Newsleaders : MP में आयुष्मान योजना पर पहरेदारी, भोपाल-इंदौर सहित चार शहरों के 480 अस्पतालो से 295 निजी अस्पताल योजना से बाहर

Newsleaders : MP में आयुष्मान योजना पर पहरेदारी, भोपाल-इंदौर सहित चार शहरों के 480 अस्पतालो से 295 निजी अस्पताल योजना से बाहर
नए सर्टिफिकेट नियम से संकट : मरीजों के लिए महंगा और मुश्किल होगा इलाज, आयुष्मान के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
भोपाल : न्यूज लीडर्स
मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना से जुड़े निजी अस्पतालों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए NABH नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स का फाइनल लेवल सर्टिफिकेट अनिवार्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

“इस निर्णय के बाद भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के कुल 480 अस्पतालों में से 295 अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर हो सकते हैं। इससे लाखों मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा प्रभावित होने की आशंका है”

◾क्यों बाहर हो सकते हैं अस्पताल.
सरकार के नए नियम के अनुसार आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को NABH का अंतिम स्तर का प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा। लेकिन इन चारों शहरों में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल अभी इस मानक को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कई छोटे अस्पतालों के लिए ये प्रक्रिया महंगी और जटिल मानी जाती है। अस्पतालों को इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, उपकरण और स्टाफ पर भारी निवेश करना पड़ता है।
◾मरीजों पर संभावित असर.
अगर बड़ी संख्या में अस्पताल योजना से बाहर हो जाते हैं तो इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहर जाना पड़ सकता है।

◾बड़े अस्पतालों में भीड़ और वेटिंग बढ़ेगी.
कई मरीजों को महंगा इलाज निजी खर्च पर करवाना पड़ सकता है, चारों शहरों की स्थिति जानिए।
▪️भोपाल में आयुष्मान कार्ड: 12.47 लाख आयुष्मान कार्ड 232 अस्पताल में सूचीबद्ध है, जबकी NABH प्रमाणित 96 अस्पताल होने से 136 अस्पताल के बाहर होने की संभावना है।
▪️इंदौर में आयुष्मान कार्ड: 11.50 लाख आयुष्मान कार्ड 112 अस्पताल में सूचीबद्ध है, जबकी
NABH प्रमाणित 35 अस्पताल होने से 77 अस्पताल के बाहर होने की संभावना है।
▪️जबलपुर में आयुष्मान कार्ड: 12.59 लाख आयुष्मान कार्ड 45 अस्पताल में सूचीबद्ध है, जबकी
NABH प्रमाणित 15 अस्पताल होने से 30 अस्पताल के बाहर होने की संभावना है।
▪️ग्वालियर में आयुष्मान कार्ड: 19.28 लाख आयुष्मान कार्ड 91अस्पताल में सूचीबद्ध है, जबकी
NABH प्रमाणित 39 अस्पताल होने से 52 अस्पताल के बाहर होने की संभावना है।

◾अस्पताल संगठनों का विरोध.
निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम एसोसिएशन ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि NABH प्रमाणन स्वैच्छिक प्रक्रिया है, इसे अनिवार्य करने से छोटे अस्पताल बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। संगठनों का तर्क है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में अस्पताल योजना से बाहर हो गए तो आयुष्मान योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा।
◾सरकार का पक्ष.
सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य इलाज की गुणवत्ता बढ़ाना है। हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो नियमों की समीक्षा भी की जा सकती है।




