Newsleaders : मप्र सरकार का बड़ा कदम, खाड़ी देशों में बसे मध्यप्रदेशवासियों के लिए एमपी हेल्पडेस्क, संकट में त्वरित सहायता की पहल
Newsleaders : मप्र सरकार का बड़ा कदम, खाड़ी देशों में बसे मध्यप्रदेशवासियों के लिए एमपी हेल्पडेस्क, संकट में त्वरित सहायता की पहल
खाड़ी देशों में फंसे मध्य प्रदेश के इंदौर के महत्वपूर्ण दिग्गज देश लौटें,
भोपाल : न्यूज लीडर्स
मध्यप्रदेश शासन ने खाड़ी देशों में रह रहे प्रदेशवासियों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है।

आवासीय आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, वर्तमान अप्रत्याशित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है, ताकि खाड़ी देशों में अध्ययन, नौकरी, व्यवसाय या पर्यटन हेतु गए मध्यप्रदेश के नागरिक किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।
▪️ इंदौर के दिग्गज पहुंचे अपने घर.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंट्रोल रूम के माध्यम से संबंधित व्यक्तियों की समस्याओं को भारत सरकार एवं अन्य एजेंसियों के समन्वय से प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास किया जाएगा।

▪️📞 24×7 कंट्रोल रूम संपर्क.
दूरभाष: 011-26772005
व्हाट्सएप: 9818963273
ईमेल: mphelpdeskgulf@gmail.com
यह पहल प्रदेश सरकार की प्रवासी नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में मध्यप्रदेश के श्रमिक, पेशेवर और विद्यार्थी कार्यरत हैं, ऐसे में यह नियंत्रण कक्ष संकट की घड़ी में राहत का माध्यम बन सकता है।

▪️सहायता केंद्र स्थापित.
नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित।
खाड़ी देशों में रह रहे मध्यप्रदेश के नागरिकों को सहायता हेतु पहल।
फोन, व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से संपर्क सुविधा।

▪️ इंदौर के दिग्गज पहुंचे अपने घर.
इस दुबई यात्रा ने इन सात को एक नई पहचान दे दी, चार्टर्ड फ्लाइट से दुबई से मुंबई पहुंचे हैं, जिसमें पूर्व विधायक विशाल पटेल, संजय शुक्ला और अन्य दिग्गज प्रवीण कक्कड़, पिंटू छाबड़ा, संजय अग्रवाल, मनीष सहारा और गोलू पाटनी सकुशल अपने घर लौटे।

▪️और अंत में.
यह कदम प्रवासी श्रमिकों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय का संकेत। खाड़ी क्षेत्र में उत्पन्न संभावित भू-राजनीतिक या श्रमिक संकट की आशंकाओं को देखते हुए एहतियाती तैयारी।

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