बिजासन घाट ‘ब्लैक स्पॉट’ मौत का सौदागर : दो चालकों की दर्दनाक मौत, कैबिन को क्रेन से काटकर चालको को निकाला, पर बच न सकी जिंदगी
बिजासन घाट ‘ब्लैक स्पॉट’ मौत का सौदागर : दो चालकों की दर्दनाक मौत, कैबिन को क्रेन से काटकर चालको को निकाला, पर बच न सकी जिंदगी
Newsleaders : सेंधवा

एक हादसा, दो मौतें और एक सवाल जो हर बार उठता है
मध्यप्रदेश के सेंधवा के पास मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर बुधवार दोपहर एक ऐसा मंज़र सामने आया जिसने एक बार फिर हमें सड़क सुरक्षा की उस कड़वी सच्चाई के सामने खड़ा कर दिया, जिसे हम बार-बार नज़रअंदाज़ करते आए हैं।
दोपहर करीब दो बजे जब दिन की रोशनी पूरी थी, मौसम साफ था, बिजासन घाट के उस हिस्से पर जिसे ‘ब्लैक स्पॉट’ और ‘डबल पुलिया’ के नाम से जाना जाता है, एक ट्रक पीछे से आ रहे ट्रेलर से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया। दोनों चालक केबिन में बुरी तरह फंस गए। ट्रक चालक की मौत घटनास्थल पर ही हो गई। दूसरे चालक को जब तक अस्पताल पहुंचाया जा सका, उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

◾ घटना का क्रम : क्या हुआ उस दोपहर?
पुलिस के मुताबिक ट्रेलर TN88M1053 बिजासन घाट उतर रहा था। पीछे से आ रहा ट्रक MP09HH8867 तेज़ रफ्तार में था और नियंत्रण खोकर ट्रेलर में जा घुसा। टक्कर की भयावहता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों चालकों को बाहर निकालने के लिए क्रेन बुलानी पड़ी और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद केबिन काटकर उन्हें बाहर निकाला जा सका।
बिजासन चौकी प्रभारी रोहित पाटीदार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज़ रफ्तार और नियंत्रण खोना माना जा रहा है। मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है।
◾ ‘ब्लैक स्पॉट’ यह नाम क्यों है
‘ब्लैक स्पॉट’ वो जगहें होती हैं जहां बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं। सड़क परिवहन विभाग इन्हें चिन्हित करता है ताकि विशेष सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
बिजासन घाट का यह हिस्सा पहले से ही ऐसे खतरनाक स्थान के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद यहां हादसे थमने का नाम नहीं लेते। सवाल यह है कि जब यह जगह खतरनाक मानी जाती है, तो यहां रम्बल स्ट्रिप्स, स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेत और निरंतर निगरानी क्यों नहीं है?

◾ रेस्क्यू ऑपरेशन : एक घंटे की वो जद्दोजहद
हादसे की सूचना मिलते ही बिजासन चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन केबिन इतनी बुरी तरह पिचकी थी कि बिना क्रेन के दोनों चालकों को बाहर निकालना संभव नहीं था।
क्रेन आई, केबिन काटी गई। करीब एक घंटे की उस मशक्कत में पुलिसकर्मियों ने जो प्रयास किए वो सराहनीय थे। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि जब तक वे बाहर आए, बहुत देर हो चुकी थी। यह घटना यह भी बताती है कि हमारे हाईवे पर हेवी रेस्क्यू उपकरण हर प्रमुख स्थान पर तैनात होने चाहिए ताकि कीमती समय बर्बाद न हो।
◾ और अंत में
सेंधवा का यह हादसा अकेला नहीं है। किसी भी ब्लैक स्पॉट पर ऐसी खबरें आती हैं। जहां दुर्घटनाओं में परिवार उजड़ते हैं। कुछ दिन चर्चा होती है और फिर सब भूल जाते हैं। तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे। क्योंकि अभी तक सवाल बाकी हैं? जवाब किसके पास है?
