Newsleaders : क्या बदल रही है देश की हवा? PM पसंद सर्वे ने दिये सियासी संकेत, नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की लोकप्रियता का लेखा-जोखा
Newsleaders : क्या बदल रही है देश की हवा? PM पसंद सर्वे ने दिये सियासी संकेत, नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की लोकप्रियता का लेखा-जोखा
न्यूज़ लीडर्स : चुगलखोर
इंडिया टुडे के ताज़ा मूड ऑफ द नेशन (MOTN) सर्वे में क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है? क्या युवाओं और महिलाओं के मुद्दों को आक्रामकता से उठाकर राहुल गांधी जनता की पहली पसंद बनते जा रहे हैं? सोशल मीडिया पर बीजेपी के पिछड़ने और विपक्ष के मजबूत होने के पीछे के असली सियासी समीकरण क्या हैं? एक बड़ा सवाल बन गया है?

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद देश की राजनीति में कई समीकरण बदले हैं। केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सरकार बनी, लेकिन इस बार बीजेपी अपने दम पर बहुमत के आंकड़े से दूर रही और एनडीए के सहयोगी दलों के सहारे सरकार बनी।
अब सवाल यह है कि करीब दो साल बाद देश के मतदाताओं का मूड किस दिशा में जा रहा है? क्या नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी उतनी ही मजबूत है, या रोजगार, महंगाई और रोजमर्रा के आर्थिक सवालों का असर उनकी लोकप्रियता पर दिखाई देने लगा है?
वहीं दूसरी तरफ, क्या राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के रूप में धीरे-धीरे एक मजबूत राजनीतिक विकल्प की जमीन तैयार कर रहे हैं? इंडिया टुडे और CVoter के ताजा Mood of the Nation सर्वे के आंकड़े इन सवालों को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार देते हैं।

“आपको बता दे, अगस्त 2026 के सर्वे में आंकड़ा इस ट्रेंड में बड़ा बदलाव लेकर आया है। ताजा सर्वे में नरेंद्र मोदी की रेटिंग घटकर 48.7 प्रतिशत रह गई है। यानी सिर्फ छह महीने में जनवरी के 55 प्रतिशत के मुकाबले 6.3 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज हुई है।”
राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद के लिए पसंद की रेटिंग में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन पांच सर्वे में राहुल गांधी की रेटिंग में गिरावट दिखाई नहीं देती। उनका ग्राफ धीरे-धीरे ऊपर गया है। क्योंकि राहुल गांधी की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है।
“उन्होंने रोजगार, महंगाई, अग्निवीर योजना, पेपर लीक, सामाजिक-आर्थिक असमानता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखा है।”

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक भूमिका मिलने से उन्हें संसद के भीतर सरकार को सीधे घेरने का एक संस्थागत मंच भी मिला है। इसके अलावा भारत जोड़ो यात्रा और उसके बाद के राजनीतिक अभियानों ने उनकी सार्वजनिक छवि को भी प्रभावित किया है। इसलिए राहुल गांधी की बढ़ती रेटिंग को विपक्ष के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

वहीं सी वोटर का सर्वे मूड ऑफ द नेशन एक समय विशेष पर जनता की राय का संकेत देता है कि चुनाव अभी दूर है और अगले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति में कई बदलाव हो सकते हैं। क्योंकि अब आगे की राजनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या मोदी अपनी हालिया गिरावट को रोककर फिर 50 प्रतिशत से ऊपर जाते हैं? क्या राहुल गांधी 27 प्रतिशत के आसपास बने रहने के बजाय अपनी रेटिंग में बड़ी बढ़ोतरी कर पाते हैं?

फिलहाल देश की राजनीतिक हवा पूरी तरह बदली नहीं है लेकिन आंकड़े यह जरूर बता रहे हैं कि हवा की दिशा को अब पहले की तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। न्यूज़ लीडर्स के लिए यह था मूड ऑफ नेशन सर्वे का राजनीतिक विश्लेषण।
