Newsleaders : बाकानेर घाट की दयनीय स्थिती पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, हजारों की मौत का कौन जिम्मेदार?
Newsleaders : बाकानेर घाट की दयनीय स्थिती पर हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, हजारों की मौत का कौन जिम्मेदार?
न्यूज लीडर्स : सेंधवा
इंदौर–मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 पर 106 करोड़ रुपये की लागत से बनी 8.8 किमी लंबी वैकल्पिक सड़क मात्र छह माह में गड्ढों में तब्दील हो गई है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने केंद्र सरकार से 15 दिसंबर तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

●》बाकानेर घाट सड़क, एक नजर.》》
📍 लागत: ₹106 करोड़, बाकानेर घाट साइड
📍 लंबाई: 8.8 किलोमीटर वैकल्पिक मार्ग
📍 स्थान: इंदौर–मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 52
📍 निर्माण अवधि: जून 2023 से नवंबर 2024
📍 स्थिति: केवल 6 माह में सड़क गड्ढों में तब्दील
●》सामाजिक कार्यकर्ता क्यों गए कोर्ट.》
सेंधवा के सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता बी.एल. जैन की याचिका में बताया गया कि भेरूघाट और बाकानेर घाट पर 2009 से अब तक 3000 से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 450 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

●》दुर्घटनाओं का आंकड़ा.》》
• 2009 से अब तक 3000 से अधिक हादसे
• 450 से ज्यादा मौतें, सैकड़ों घायल
• हाल ही में गड्ढे से बचने में कार दुर्घटना, 24 वर्षीय युवक की मौत
एनएचएआई ने हादसों से बचाव के लिए बाकानेर साइड में नई सड़क बनवाई थी, परंतु निर्माण गुणवत्ता खराब होने से थोड़ी बारिश में ही सड़क बर्बाद हो गई। हाल ही में गड्ढों से बचने के दौरान एक कार डंपर से टकरा गई, जिसमें एक युवक की मौत हुई।

न्यायालय ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन को मामले की जांच कर 15 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
●》न्यायालय की सख्ती》》
• मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने केंद्र सरकार से मांगी रिपोर्ट।
• 15 दिसंबर 2025 तक विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश।
• जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन को सौंपी।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि बार-बार जानलेवा हादसे एनएचएआई की लापरवाही को दर्शाते हैं, इसलिए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी तय कर रिपोर्ट देनी होगी।


गौरतलब है की सड़क निर्माण में गंभीर तकनीकी खामियां और घटिया गुणवत्ता सामने आई है। एनएचएआई और ठेकेदार कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगें है, केवल दिखावटी मरम्मत से स्थायी सुधार नहीं हो पाया।
